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मंत्र संग्रह

विष्णु

विष्णु गायत्री

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

Oṁ nārāyaṇāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi, tanno viṣṇuḥ pracodayāt

सरल उच्चारण: Om naa-raa-ya-naa-ya vid-ma-he, vaa-su-de-vaa-ya dhee-ma-hi, tan-no vish-nuh pra-cho-da-yaat

भक्तिविद्या और ज्ञान

इस मंत्र के विषय में

विष्णु गायत्री — महानारायण उपनिषद के गायत्री-रूप ध्यानों में से एक, जो किसी देवता के नामों को सावित्री गायत्री के त्रिपद साँचे में रखते हैं: हम जानें, हम ध्यान करें, वे प्रेरित करें।

अर्थ

हम नारायण को जानें; वासुदेव का ध्यान करें; विष्णु हमें प्रेरित करें। तीन नाम, तीन गतियाँ: सबके आश्रय (नारायण), सबके अंतर्यामी (वासुदेव), और सर्वव्यापी (विष्णु) से प्रार्थना कि वे ध्यान करती बुद्धि को ही गति दें। प्रार्थना का शांत तर्क: जो सर्वत्र व्याप्त है, वह बुद्धि में भी व्याप्त है ही — वहीं सक्रिय हो।

कब जपें

स्थिर विष्णु-साधना के लिए — गुरुवार का अभ्यास, एकादशी के जागरण, और सत्यनारायण कथा से पहले; यह कभी-कभार का नहीं, साधक का मंत्र है।

शब्द-दर-शब्द

नारायणाय विद्महेnārāyaṇāya vidmahe
हम नारायण को जानते हैं
वासुदेवाय धीमहिvāsudevāya dhīmahi
वासुदेव का ध्यान करते हैं
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्tanno viṣṇuḥ pracodayāt
विष्णु हमें प्रेरित करें

स्रोत: तैत्तिरीय आरण्यक १० (महानारायण उपनिषद)

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

Oṁ nārāyaṇāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi, tanno viṣṇuḥ pracodayāt

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