अन्य देव
अय्यप्पा शरणम्
स्वामिये शरणम् अय्यप्पा
Svāmiye śaraṇam Ayyappā
सरल उच्चारण: Svaa-mi-ye sha-ra-nam ay-yap-paa
इस मंत्र के विषय में
सबरीमला का यात्री-मंत्र: वन-पथ का हर पग, 41-दिवसीय व्रतधारी हर श्याम-वस्त्र भक्त, यही एक पंक्ति साँस लेता है। अय्यप्पा — शिव और विष्णु के मोहिनी रूप से जन्मे — अपनी पहाड़ी पर हर जाति-पंथ को समान स्वीकारते हैं; मंत्र की एकमात्र योग्यता है शरणागति।
अर्थ
हे स्वामी, मेरी शरण आप हैं, अय्यप्पा। वाक्य का व्याकरण ही सब सौंप चुका है — इसमें 'मैं' बचता ही नहीं; केवल शरण और शरण्य। सबरीमला की चढ़ाई पर हर यात्री भी 'स्वामी' कहकर ही पुकारा जाता है, क्योंकि व्रत की शिक्षा एक है: देव और उन तक चलने वाले में भेद न किया जाए। कहीं भी कहा जाए — यह मंत्र वही यात्रा वहीं कर लेता है।
कब जपें
व्रत का अखंड संगी — मंडल-काल (नवम्बर से जनवरी) और सबरीमला यात्रा; और जब भी समर्पण को केवल मानना नहीं, साधना हो — तब कहा जाता है।
शब्द-दर-शब्द
- स्वामियेsvāmiye
- हे स्वामी
- शरणम्śaraṇam
- शरण
- अय्यप्पाayyappā
- हरि-हर पुत्र अय्यप्पा
स्रोत: अय्यप्पा भक्ति परंपरा (सबरीमला)