सार्वभौम
सह नाववतु — विद्यार्थी की प्रार्थना
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥
Oṁ saha nāv avatu, saha nau bhunaktu, saha vīryaṁ karavāvahai, tejasvi nāv adhītam astu mā vidviṣāvahai
सरल उच्चारण: Om sa-ha naa-va-va-tu, sa-ha nau bhu-nak-tu, sa-ha veer-yam ka-ra-vaa-va-hai, te-jas-vi naa-va-dhee-tam as-tu, maa vid-vi-shaa-va-hai
इस मंत्र के विषय में
गुरु और शिष्य अध्ययन आरंभ करने से पहले जो शांति-पाठ साथ पढ़ते हैं — पाँच कामनाएँ, सब द्विवचन में: जो भी माँगा गया, दोनों के लिए माँगा गया।
अर्थ
हम दोनों की साथ-साथ रक्षा हो; दोनों का साथ पोषण हो; हम मिलकर सामर्थ्य से कार्य करें; हमारा अध्ययन तेजस्वी हो; हम परस्पर द्वेष न करें। अंतिम पद की स्पष्टता ही इस प्रार्थना को अमर करती है। परंपरा जानती थी कि विद्या मनों के बीच केवल सद्भाव के सेतु से गुज़रती है — इसलिए यात्रा से पहले सेतु की ही प्रार्थना कर ली जाती है।
कब जपें
कक्षा के पहले शब्द — अध्ययन, शिष्यत्व या सहकार्य से पहले गुरु-शिष्य साथ पढ़ते हैं; शैक्षणिक वर्ष परंपरा से इसी से खुलते हैं।
शब्द-दर-शब्द
- सह नाववतुsaha nāv avatu
- हम दोनों की साथ रक्षा हो
- सह नौ भुनक्तुsaha nau bhunaktu
- हम दोनों का साथ पोषण हो
- सह वीर्यं करवावहैsaha vīryaṁ karavāvahai
- हम मिलकर सामर्थ्य से कार्य करें
- तेजस्वि नावधीतमस्तुtejasvi nāv adhītam astu
- हमारा अध्ययन तेजस्वी हो
- मा विद्विषावहैmā vidviṣāvahai
- हम परस्पर द्वेष न करें
स्रोत: तैत्तिरीय उपनिषद (ब्रह्मानन्द-वल्ली का शांति-पाठ) और कठ उपनिषद

