नवग्रह
राहु ग्रह मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
Oṁ bhrāṁ bhrīṁ bhrauṁ saḥ rāhave namaḥ
सरल उच्चारण: Om bhraam bhreem bhraum sah raa-ha-ve na-mah
इस मंत्र के विषय में
राहु — चन्द्रमा के उत्तर छाया-बिंदु — का बीज-मंत्र; छाया-ग्रह, जिसका न कोई पिंड है, न अपना कोई वार। पुराण उस असुर की कथा कहते हैं जिसका कटा सिर आज भी ग्रहण में सूर्य-चन्द्र को ग्रसता है; ज्योतिष राहु को लौकिक इच्छा, अपरंपरा और आकस्मिक परिवर्तन का कारक मानता है।
अर्थ
ॐ — 'भ्रां भ्रीं भ्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — राहु (उत्तर छाया-बिंदु) को प्रणाम — वह छाया जो ग्रहण में सूर्य को ग्रस लेती है। राहु अथाह भूख हैं — महत्वाकांक्षा, धुन, अपरंपरागत पथ। जाप प्रार्थना है कि यह प्रबल खिंचाव किसी ऐसी दिशा में मुड़े जहाँ पहुँचना सार्थक हो।
कब जपें
ग्रहण-काल के आसपास और शनिवार को; जब महत्वाकांक्षा धुन बनने लगे, आकस्मिक उथल-पुथल में, और मार्ग के अपरंपरागत मोड़ों पर इसका जाप होता है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव
- भ्रां भ्रीं भ्रौं सःbhrāṁ bhrīṁ bhrauṁ saḥ
- इस ग्रह के बीजाक्षर
- राहवेrāhave
- राहु के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

