सार्वभौम
पूर्णमदः — पूर्णता का मंत्र
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
Oṁ pūrṇam adaḥ pūrṇam idaṁ pūrṇāt pūrṇam udacyate, pūrṇasya pūrṇam ādāya pūrṇam evāvaśiṣyate
सरल उच्चारण: Om poor-nam a-dah poor-nam i-dam, poor-naat poor-nam u-dach-ya-te, poor-nas-ya poor-nam aa-daa-ya, poor-nam e-vaa-va-shish-ya-te
इस मंत्र के विषय में
ईशावास्य उपनिषद का शांति-मंत्र — परब्रह्म की पूर्णता का ध्यान: पूर्ण से पूर्ण निकल जाने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।
अर्थ
वह पूर्ण है; यह पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण प्रकट होता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है। यह वह गणित है जिसमें केवल अनंत उत्तीर्ण होता है: पूर्ण में से पूर्ण घटाओ — पूर्ण ही शेष। ईशावास्य से पहले गाया गया यह मंत्र अध्ययन-मात्र का भय पहले ही हर लेता है: कि सत्य कहीं चुक न जाए, या जानने वाला अंश लेकर उसे घटा न दे।
कब जपें
उपनिषद-अध्ययन का आरंभ और समापन; पढ़ाने से पहले, एकांत-साधना के आरंभ पर, और जब भी अभाव का भय उस पुराने गणित की माँग करे।
शब्द-दर-शब्द
- पूर्णमदःpūrṇam adaḥ
- वह (अदृश्य ब्रह्म) पूर्ण है
- पूर्णमिदंpūrṇam idaṁ
- यह (दृश्य जगत) पूर्ण है
- पूर्णात्पूर्णमुदच्यतेpūrṇāt pūrṇam udacyate
- पूर्ण से पूर्ण प्रकट होता है
- पूर्णस्य पूर्णमादायpūrṇasya pūrṇam ādāya
- पूर्ण में से पूर्ण लेकर
- पूर्णमेवावशिष्यतेpūrṇam evāvaśiṣyate
- पूर्ण ही शेष रहता है
स्रोत: ईशावास्य उपनिषद — शांति-पाठ (बृहदारण्यक उपनिषद ५.१.१ में भी)

