अन्य देव
कार्तिकेय (मुरुगन) मंत्र
ॐ शरवणभवाय नमः
Oṁ Śaravaṇabhavāya Namaḥ
सरल उच्चारण: Om sha-ra-va-na-bha-vaa-ya na-mah
इस मंत्र के विषय में
कार्तिकेय — मुरुगन, स्कन्द, सुब्रह्मण्य — का मंत्र; शरवण में जन्मे देव-सेनापति, तमिल प्रदेशों और उसके पार सर्वप्रिय।
अर्थ
ॐ, शरवणभव को प्रणाम — 'शरवण में जन्मे': सरकंडों का वह सरोवर, जहाँ शिव की अग्नि की छह चिंगारियाँ एक छह-मुख शिशु बन गईं। यह नाम स्वयं छह अक्षरों का मंत्र है — श-र-व-ण-भ-व — परंपरा कहती है, मुरुगन के हर मुख के लिए एक। साधक असंभव आरंभ के देव को नमन करता है: बिखरी शुरुआतें, माता द्वारा समेटी हुईं, सेनापति में ढली हुईं।
कब जपें
स्कन्द षष्ठी और थाईपूसम इसके पर्व हैं; दक्षिण में मंगलवार मुरुगन का है। हर प्रकार के अभियान से पहले गिना जाता है — परीक्षाएँ, प्रतियोगिताएँ, बिखराव के बाद की नई शुरुआतें।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- शरवणभवायśaravaṇabhavāya
- शरवण में जन्मे के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: स्कन्द परंपरा का पारंपरिक षडक्षर मंत्र

