सूर्य
रवि — प्रकाशमान, स्तुत्य (सूर्य के बारह नामों में दूसरा)
ॐ रवये नमः
सरल उच्चारण
Om ra-va-ye na-mah
Oṁ Ravaye Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
रवि — 'प्रकाशमान, स्तुत्य' — दूसरा नाम। मित्र जहाँ सूर्य को सखा कहकर पुकारता है, रवि वह कहता है जो आँखों को सचमुच मिलता है: वह दीप्ति जिसकी स्तुति संसार की हर भाषा ने की है। सप्ताह आज भी इसी नाम से खुलता है — रविवार इसी का है।
अर्थ
ॐ, रवि को प्रणाम — वह प्रकाशमान जिसकी सब स्तुति करते हैं। मंत्र दीप्ति के सीधे-सरल सत्य को नमन है: वह प्रकाश जिसे देखने के लिए किसी और दीये की आवश्यकता नहीं। इसे कहते हुए साधक संसार के सबसे पुराने समवेत गान में सम्मिलित होता है — सूर्य के नीचे का सब कुछ, सूर्य की स्तुति करता हुआ।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ रवये नमः
Oṁ Ravaye Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। जिन सुबहों में माँगने से अधिक धन्यवाद की आवश्यकता हो, उनमें रवि को स्मरण करें — और स्वयं रविवार को, जो उन्हीं के नाम का वार है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- रवयेravaye
- प्रकाशमान, स्तुत्य
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

