शिव
ॐ नमो भगवते रुद्राय
ॐ नमो भगवते रुद्राय
Oṁ Namo Bhagavate Rudrāya
सरल उच्चारण: Om na-mo bha-ga-va-te rud-raa-ya
इस मंत्र के विषय में
रुद्र को प्रणाम — वह नाम, जिससे वेदों ने शिव को पहले-पहल जाना। श्रीरुद्रम् का पाठ इसी मंगलाचरण-पंक्ति से आरंभ होता है — एक पंक्ति, जो गृहस्थ दिन-भर साथ रख सके।
अर्थ
ॐ, भगवान रुद्र को प्रणाम। 'भगवते' उन्हें पूर्ण ऐश्वर्यमय प्रभु कहता है; 'रुद्र' वह प्राचीन झंझा-नाम है — हुंकार करने वाला — जिसके बाणों में, वेद कहते हैं, विद्युत के साथ औषधि भी है। यह मंत्र वैसे कहा जाता है जैसे कोई सावन की धार में खड़ा हो: उस शक्ति को नमन, जो एक ही भाव में भिगोती भी है और भरती भी।
कब जपें
जीवन की झंझा-ऋतुओं के योग्य — उथल-पुथल, रूपांतरण माँगता क्रोध, सावन के वर्षा-भीगे सोमवार, और शिवरात्रि की रात के प्रचंड प्रहर।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- नमोnamo
- प्रणाम
- भगवतेbhagavate
- भगवान के लिए
- रुद्रायrudrāya
- रुद्र के लिए
स्रोत: रुद्र उपासना परंपरा (श्रीरुद्रम्)

