सूर्य
मित्र — सब प्राणियों के मित्र (सूर्य के बारह नामों में पहला)
ॐ मित्राय नमः
सरल उच्चारण
Om mit-raa-ya na-mah
Oṁ Mitrāya Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
मित्र — 'सखा' — बारह नामों का पहला: सूर्य शक्ति या वैभव होने से पहले वह संगी है जिसने आज तक एक भी भोर नहीं छोड़ी। वेदों में मित्र मैत्री और वचन-पालन के देवता हैं, संधियों के साक्षी; इस नाम से उषा का अभिवादन दिन को अपना सहयोगी बनाकर करना है।
अर्थ
ॐ, मित्र को प्रणाम — सबके सखा। पहली किरण का वंदन स्वयं मैत्री के रूप में होता है: सूर्य बिना बुलाए हर प्राणी पर चमकता है और बदले में कुछ नहीं माँगता। मित्र को नमन कर साधक दिन का आरंभ उसी अचल सद्भाव के संकल्प से करता है।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ मित्राय नमः
Oṁ Mitrāya Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। जब दिन दूसरों से जुड़ा हो, तब मित्र से आरंभ करें — नई साझेदारी, टूटी मित्रता की मरम्मत, या किसी कठिन व्यक्ति से सद्भावपूर्वक भेंट।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- मित्रायmitrāya
- सब प्राणियों के मित्र
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

