सूर्य
मरीचि — किरणों के स्वामी (सूर्य के बारह नामों में आठवाँ)
ॐ मरीचये नमः
सरल उच्चारण
Om ma-ree-cha-ye na-mah
Oṁ Marīcaye Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
मरीचि — 'किरणों के स्वामी' — आठवाँ नाम। मरीचि का अर्थ है एक किरण — प्रकाश का कण-सा: धूल में झिलमिल, उषा के छोर की चमक। यह नाम सूर्य को दूर के बिंब रूप में नहीं, बल्कि यहाँ की वस्तुओं तक सचमुच पहुँचते प्रकाश के असंख्य स्पर्शों के रूप में वंदन करता है।
अर्थ
ॐ, मरीचि को प्रणाम — किरणों के अधिपति। साधक प्रकाश को वहीं प्रणाम करता है जहाँ वह पहुँचता है: झरोखे से आती किरण, त्वचा पर उतरती ऊष्मा, आँख जगा देने वाली चमक। प्रणाम यह माँगता है कि सूर्य का भेजा हुआ प्रकाश साधक तक भी उसी तरह पहुँचे — छूकर, तपाकर, जगाकर।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ मरीचये नमः
Oṁ Marīcaye Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। मरीचि सबसे पहली किरण के योग्य है — ब्राह्म मुहूर्त की साधना, और दैनिक कृपाओं के लिए छोटे-छोटे धन्यवाद के क्षण।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- मरीचयेmarīcaye
- किरणों के स्वामी
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

