सूर्य
हिरण्यगर्भ — सृष्टि के स्वर्णिम बीज (सूर्य के बारह नामों में सातवाँ)
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
Oṁ Hiraṇyagarbhāya Namaḥ
सरल उच्चारण: Om hi-ran-ya-gar-bhaa-ya na-mah
इस मंत्र के विषय में
हिरण्यगर्भ — 'स्वर्णिम गर्भ' — सातवाँ नाम, और क्रम सहसा ब्रह्मांड छू लेता है: ऋग्वेद का सृष्टि-सूक्त हिरण्यगर्भ को वह सोने का बीज कहता है जो देवों से भी पहले प्रकट हुआ, द्यावा-पृथिवी को धारण किए। हर सूर्योदय का वंदन समस्त सृष्टि की पहली भोर के दैनिक पुनरागमन रूप में होता है।
अर्थ
ॐ, हिरण्यगर्भ को प्रणाम — वह स्वर्ण-गर्भ जिससे सृष्टि आई। प्रणाम सूर्य-बिंब से आगे उस तक जाता है जिसे सूक्त सबसे पहले कहता है: रूप से पहले प्रकाश, जीवन से पहले ऊष्मा। साधक माँगता है कि आज जो भी आरंभ हो, वह वैसे ही थामा रहे जैसे स्वर्ण-बीज ने द्यावा-पृथिवी को थामा।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। बड़े आरंभों के लिए सुरक्षित — पहला दिन, परिवार में जन्म, या किसी भी ऐसे कार्य की शुरुआत जिसे विशाल होना है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- हिरण्यगर्भायhiraṇyagarbhāya
- सृष्टि के स्वर्णिम बीज
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

