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Dharamkira
मंत्र संग्रह

विष्णु

अच्युतानन्त गोविन्द

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात् । नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥

Acyutānanta-govinda nāmoccāraṇa-bheṣajāt, naśyanti sakalā rogāḥ satyaṁ satyaṁ vadāmy aham

सरल उच्चारण: Ach-yu-taa-nan-ta go-vin-da naa-moch-chaa-ra-na bhe-sha-jaat, nash-yan-ti sa-ka-laa ro-gaah, sat-yam sat-yam va-daam-ya-ham

आरोग्यभक्ति

इस मंत्र के विषय में

तीन नामों — अच्युत, अनन्त, गोविन्द — का आरोग्य-श्लोक। रचयिता अज्ञात; यह किसी एक शास्त्र से नहीं, वैष्णव और आयुर्वेदिक पाठ-परंपराओं से चला आया है।

अर्थ

अच्युत, अनन्त, गोविन्द — इन नामों के उच्चारण रूपी औषध से समस्त रोग नष्ट होते हैं — मैं सत्य कहता हूँ, सत्य कहता हूँ। तीन नाम तीन औषधियों की तरह चुने गए हैं: जो कभी च्युत नहीं होते (जब देह साथ छोड़े), जो अनन्त हैं (जब समय दबाए), जो अपने गोधन को सँभालते हैं (जब कोई सुध न ले)। और दोहराया गया 'सत्यं' — सत्य, सत्य — श्लोक का अपने ही वचन पर लगाया गया दाँव है।

कब जपें

परंपरा से रोगियों के लिए पढ़ा जाता है — औषधि के ऊपर, रोगशय्या के पास, स्वास्थ्य-लाभ की अवधि में — और घर-भर के आरोग्य की प्रार्थना करने वालों द्वारा प्रतिदिन।

शब्द-दर-शब्द

अच्युतacyuta
जो कभी च्युत नहीं होते
अनन्तananta
अनन्त, जिनका अंत नहीं
गोविन्दgovinda
गौ और पृथ्वी के पालक
नामोच्चारणभेषजात्nāmoccāraṇa-bheṣajāt
नाम-उच्चारण रूपी औषध से
नश्यन्ति सकला रोगाःnaśyanti sakalā rogāḥ
समस्त रोग नष्ट होते हैं
सत्यं सत्यं वदाम्यहम्satyaṁ satyaṁ vadāmy aham
मैं सत्य-सत्य कहता हूँ

स्रोत: विष्णु-नाम परंपरा का पारंपरिक आरोग्य-श्लोक

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात् । नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥

Acyutānanta-govinda nāmoccāraṇa-bheṣajāt, naśyanti sakalā rogāḥ satyaṁ satyaṁ vadāmy aham

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